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अम्न लख़नवी

1898 - 1983 | लखनऊ, भारत

राष्ट्रीय एकता, धार्मिक एकता और जज़्बा-ए-आज़ादी को समर्पित शायरी के लिए मशहूर , स्वतंत्रता सेनानी

राष्ट्रीय एकता, धार्मिक एकता और जज़्बा-ए-आज़ादी को समर्पित शायरी के लिए मशहूर , स्वतंत्रता सेनानी

अम्न लख़नवी

ग़ज़ल 13

नज़्म 1

 

अशआर 8

ज़िंदगी इक सवाल है जिस का जवाब मौत है

मौत भी इक सवाल है जिस का जवाब कुछ नहीं

कहानी अपनी अपनी अहल-ए-महफ़िल जब सुनाते हैं

मुझे भी याद इक भूला हुआ अफ़्साना आता है

ज़मीं पर हैं वो कुछ मिट्टी के पुतले

कि जिन में रिफ़अतें हैं आसमाँ की

मुकम्मल दास्ताँ का इख़्तिसार इतना ही काफ़ी है

सुलाया शोर-ए-दुनिया ने जगाया शोर-ए-महशर ने

ज़बान दहन से जो खुलते नहीं हैं

वो खुल जाते हैं राज़ अक्सर नज़र से

क़िस्सा 2

 

पुस्तकें 11

चित्र शायरी 1

 

वीडियो 3

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
तलाश

चंद खोए हुए लम्हात को करता हूँ तलाश अम्न लख़नवी

है 'आरज़ी हयात बस इतनी सी बात है

अम्न लख़नवी

जिस में अमल का जोश नहीं वो शबाब क्या

अम्न लख़नवी

"लखनऊ" के और शायर

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