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अनवर मिर्ज़ापुरी

मिर्ज़ापुर, भारत

1960 और 1970 के दशकों में मुशायरों के लोकप्रिय शायर

1960 और 1970 के दशकों में मुशायरों के लोकप्रिय शायर

ग़ज़ल 7

शेर 7

काश हमारी क़िस्मत में ऐसी भी कोई शाम जाए

इक चाँद फ़लक पर निकला हो इक चाँद सर-ए-बाम जाए

मिरे अश्क भी हैं इस में ये शराब उबल जाए

मिरा जाम छूने वाले तिरा हाथ जल जाए

my tears too this does contain,this wine may start to boil

be careful for my goblet burns with rare intensity

my tears too this does contain,this wine may start to boil

be careful for my goblet burns with rare intensity

अभी रात कुछ है बाक़ी उठा नक़ाब साक़ी

तिरा रिंद गिरते गिरते कहीं फिर सँभल जाए

as yet the night does linger on do not remove your veil

lest your besotten follower re-gains stability

as yet the night does linger on do not remove your veil

lest your besotten follower re-gains stability

ई-पुस्तक 1

 

वीडियो 10

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यहाँ काँप जाते हैं फ़लसफ़े ये बड़ा अजीब मक़ाम है

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जगजीत सिंह

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