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अनवर साबरी

1901 - 1985 | दिल्ली, भारत

विद्वान, स्वतंत्रता सेनानी और वक्ता, अपनी शायरी में सूफीवाद और मस्तानगी के लिए मशहूर

विद्वान, स्वतंत्रता सेनानी और वक्ता, अपनी शायरी में सूफीवाद और मस्तानगी के लिए मशहूर

अनवर साबरी

ग़ज़ल 24

नज़्म 2

 

अशआर 31

ज़ुल्मतों में रौशनी की जुस्तुजू करते रहो

ज़िंदगी भर ज़िंदगी की जुस्तुजू करते रहो

मैं जो रोया उन की आँखों में भी आँसू गए

हुस्न की फ़ितरत में शामिल है मोहब्बत का मिज़ाज

तमाम उम्र क़फ़स में गुज़ार दी हम ने

ख़बर नहीं कि नशेमन की ज़िंदगी क्या है

जीने वाले तिरे बग़ैर दोस्त

मर जाते तो और क्या करते

लब पे काँटों के है फ़रियाद-ओ-बुका मेरे बाद

कोई आया ही नहीं आबला-पा मेरे बाद

पुस्तकें 8

 

ऑडियो 10

उम्र गुज़री है इल्तिजा करते

ज़िंदगी के हसीं बहाने से

तज्दीद-ए-रस्म-ओ-राह-ए-मुलाक़ात कीजिए

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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