Asad Ali Khan Qalaq's Photo'

असद अली ख़ान क़लक़

1820 - 1879 | लखनऊ, भारत

अवध के आख़िरी नवाब वाजिद अली शाह के प्रमुख दरबारी और आफ़ताबुद्दौला शम्स-ए-जंग के ख़िताब से सम्मानित शायर

अवध के आख़िरी नवाब वाजिद अली शाह के प्रमुख दरबारी और आफ़ताबुद्दौला शम्स-ए-जंग के ख़िताब से सम्मानित शायर

असद अली ख़ान क़लक़

ग़ज़ल 53

अशआर 73

अदा से देख लो जाता रहे गिला दिल का

बस इक निगाह पे ठहरा है फ़ैसला दिल का

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अपने बेगाने से अब मुझ को शिकायत रही

दुश्मनी कर के मिरे दोस्त ने मारा मुझ को

बे-ख़ुदी-ए-दिल मुझे ये भी ख़बर नहीं

किस दिन बहार आई मैं दीवाना कब हुआ

आख़िर इंसान हूँ पत्थर का तो रखता नहीं दिल

बुतो इतना सताओ ख़ुदा-रा मुझ को

दस्त-ए-जुनूँ ने फाड़ के फेंका इधर-उधर

दामन अबद में है तो गरेबाँ अज़ल में है

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पुस्तकें 10

 

चित्र शायरी 1

 

ऑडियो 6

आश्ना होते ही उस इश्क़ ने मारा मुझ को

डोरा नहीं है सुरमे का चश्म-ए-सियाह में

था क़स्द-ए-क़त्ल-ए-ग़ैर मगर मैं तलब हुआ

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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