ग़ज़ल 3

 

शेर 3

शराब बंद हो साक़ी के बस की बात नहीं

तमाम शहर है दो चार दस की बात नहीं

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असरार अगर समझे दुनिया की हर इक शय के

ख़ुद अपनी हक़ीक़त से ये बे-ख़बरी क्यूँ है

रहें रिंद ये ज़ाहिद के बस की बात नहीं

तमाम शहर है दो-चार दस की बात नहीं

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पुस्तकें 1

मर्सिया-ए-इक़बाल

 

 

 

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