असद रिज़वी
ग़ज़ल 24
नज़्म 12
अशआर 1
सुकून लुटता रहेगा फ़ज़ा ही ऐसी है
तुम्हारे शहर की आब-ओ-हवा ही ऐसी है
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सुकून लुटता रहेगा फ़ज़ा ही ऐसी है
तुम्हारे शहर की आब-ओ-हवा ही ऐसी है
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