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असर रामपुरी

1892 - 1963

जलील मानकपुरी और आरज़ू लखनवी के प्रिय शागिर्द; ग़ज़ल, रुबाई और मसनवी जैसी विधाओं में रचनाएं कीं. नये सीखनेवालों के लिए एक फ़ारसी लुग़त भी सम्पादित की

जलील मानकपुरी और आरज़ू लखनवी के प्रिय शागिर्द; ग़ज़ल, रुबाई और मसनवी जैसी विधाओं में रचनाएं कीं. नये सीखनेवालों के लिए एक फ़ारसी लुग़त भी सम्पादित की

असर रामपुरी

ग़ज़ल 2

 

शेर 3

इश्क़ में शिकवा कुफ़्र है और हर इल्तिजा हराम

तोड़ दे कासा-ए-मुराद इश्क़ गदागरी नहीं

तुम चाहो तो दो लफ़्ज़ों में तय होते हैं झगड़े

कुछ शिकवे हैं बेजा मिरे कुछ उज़्र तुम्हारे

बे-वज्ह नहीं हुस्न की तनवीर में ताबिश

लौ देते हैं ख़ाकिस्तर-ए-उल्फ़त के शरारे

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पुस्तकें 1

Armughan-e-Paras

Part-001