Ashhad Bilal Ibn-e-chaman's Photo'

अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन

1980 | संयुक्त अरब अमीरात

ग़ज़ल 9

शेर 8

आज भी नक़्श हैं दिल पर तिरी आहट के निशाँ

हम ने उस राह से औरों को गुज़रने दिया

याद रखना भी इक इबादत है

क्यूँ हम उन का हाफ़िज़ा हो जाएँ

आओ तो मेरे सहन में हो जाए रौशनी

मुद्दत गुज़र गई है चराग़ाँ किए हुए