Aslam Kolsarii's Photo'

असलम कोलसरी

1946 - 2016 | लाहौर, पाकिस्तान

ग़ज़ल 19

शेर 9

जाने किस लम्हा-ए-वहशी की तलब है कि फ़लक

देखना चाहे मिरे शहर को जंगल कर के

जब मैं उस के गाँव से बाहर निकला था

हर रस्ते ने मेरा रस्ता रोका था

क़रीब के भी इक शख़्स हो सका मिरा

यही है मेरी हक़ीक़त यही फ़साना मिरा

"लाहौर" के और शायर

  • मोहम्मद हनीफ़ रामे मोहम्मद हनीफ़ रामे
  • अदीम हाशमी अदीम हाशमी
  • नज़ीर क़ैसर नज़ीर क़ैसर
  • अमजद इस्लाम अमजद अमजद इस्लाम अमजद
  • ख़ालिद अहमद ख़ालिद अहमद
  • असग़र नदीम सय्यद असग़र नदीम सय्यद
  • शफ़ीक़ सलीमी शफ़ीक़ सलीमी
  • मोहम्मद ख़ालिद मोहम्मद ख़ालिद
  • मुनीर सैफ़ी मुनीर सैफ़ी
  • बासिर सुल्तान काज़मी बासिर सुल्तान काज़मी

Added to your favorites

Removed from your favorites