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अज़ीज़ हामिद मदनी

1922 - 1991 | कराची, पाकिस्तान

नई उर्दू शायरी के प्रतिष्ठित हस्ताक्षर, उनकी कई ग़ज़लें गायी गई हैं।

नई उर्दू शायरी के प्रतिष्ठित हस्ताक्षर, उनकी कई ग़ज़लें गायी गई हैं।

अज़ीज़ हामिद मदनी

ग़ज़ल 41

शेर 37

जो बात दिल में थी उस से नहीं कही हम ने

वफ़ा के नाम से वो भी फ़रेब खा जाता

ख़ूँ हुआ दिल कि पशीमान-ए-सदाक़त है वफ़ा

ख़ुश हुआ जी कि चलो आज तुम्हारे हुए लोग

मेरी वफ़ा है उस की उदासी का एक बाब

मुद्दत हुई है जिस से मुझे अब मिले हुए

तिलिस्म-ए-ख़्वाब-ए-ज़ुलेख़ा दाम-ए-बर्दा-फ़रोश

हज़ार तरह के क़िस्से सफ़र में होते हैं

माना कि ज़िंदगी में है ज़िद का भी एक मक़ाम

तुम आदमी हो बात तो सुन लो ख़ुदा नहीं

पुस्तकें 3

Aaj Bazar Mein Paba Jolan Chalo

Faiz Ahmad Faiz Ek Mutala

1988

Kulliyat-e-Azeez Hamid Madani

 

2013

Saughat,Bangalore

Pahli Kitab

1991

 

वीडियो 8

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए

अज़ीज़ हामिद मदनी

अज़ीज़ हामिद मदनी

गिल का वो रुख़ बहार के आग़ाज़ से उठा

अज़ीज़ हामिद मदनी

नरमी हवा की मौज-ए-तरब-ख़ेज़ अभी से है

अज़ीज़ हामिद मदनी

फ़िराक़ से भी गए हम विसाल से भी गए

अज़ीज़ हामिद मदनी

ऑडियो 6

क्या हुए बाद-ए-बयाबाँ के पुकारे हुए लोग

दिलों की उक़्दा-कुशाई का वक़्त है कि नहीं

फ़िराक़ से भी गए हम विसाल से भी गए

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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