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अज़रा नक़वी

1952 | नोएडा, भारत

प्रसिद्ध कवयित्री, कहानीकार और अनुवादक. समकालीन सऊदी साहित्य के अनुवाद के लिए जानी जाती हैं

प्रसिद्ध कवयित्री, कहानीकार और अनुवादक. समकालीन सऊदी साहित्य के अनुवाद के लिए जानी जाती हैं

बचपन कितना प्यारा था जब दिल को यक़ीं जाता था

मरते हैं तो बन जाते हैं आसमान के तारे लोग

फैलते हुए शहरो अपनी वहशतें रोको

मेरे घर के आँगन पर आसमान रहने दो

आने वाले कल की ख़ातिर हर हर पल क़ुर्बान किया

हाल को दफ़ना देते हैं हम जीने की तय्यारी में

अब की बार जो घर जाना तो सारे एल्बम ले आना

वक़्त की दीमक लग जाती है यादों की अलमारी में

हक़ीक़तें तो मिरे रोज़ शब की साथी हैं

मैं रोज़ शब की हक़ीक़त बदलना चाहती हूँ