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बक़ा उल्लाह 'बक़ा'

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मीर और सौदा के विवादास्पद समकालीन, दोनों शायरों की आलोचना के शिकार हुए

मीर और सौदा के विवादास्पद समकालीन, दोनों शायरों की आलोचना के शिकार हुए

ग़ज़ल 30

शेर 23

इश्क़ में बू है किबरियाई की

आशिक़ी जिस ने की ख़ुदाई की

इश्क़ ने मंसब लिखे जिस दिन मिरी तक़दीर में

दाग़ की नक़दी मिली सहरा मिला जागीर में

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छोड़ कर कूचा-ए-मय-ख़ाना तरफ़ मस्जिद के

मैं तो दीवाना नहीं हूँ जो चलूँ होश की राह

ई-पुस्तक 1

दीवान-ए-बक़ा