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बशर नवाज़

1935 - 2015 | औरंगाबाद, भारत

प्रतिष्ठित प्रगतिशील शायर,आलोचक,पटकथा लेखक,और गीतकार/ फ़िल्म 'बाजार' के गीत 'करोगे याद तो हर बात याद आएगी' के लिए प्रसिद्ध

प्रतिष्ठित प्रगतिशील शायर,आलोचक,पटकथा लेखक,और गीतकार/ फ़िल्म 'बाजार' के गीत 'करोगे याद तो हर बात याद आएगी' के लिए प्रसिद्ध

ग़ज़ल 19

नज़्म 13

शेर 11

करोगे याद तो हर बात याद आएगी

गुज़रते वक़्त की हर मौज ठहर जाएगी

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कहते कहते कुछ बदल देता है क्यूँ बातों का रुख़

क्यूँ ख़ुद अपने-आप के भी साथ वो सच्चा नहीं

जाने किन रिश्तों ने मुझ को बाँध रक्खा है कि मैं

मुद्दतों से आँधियों की ज़द में हूँ बिखरा नहीं

पुस्तकें 5

Ajnabi Samundar

 

1997

Naye Classic

 

1973

रायगाँ

 

1972

Raegan

 

1972

 

चित्र शायरी 2

चुप-चाप सुलगता है दिया तुम भी तो देखो किस दर्द को कहते हैं वफ़ा तुम भी तो देखो महताब-ब-कफ़ रात कसे ढूँड रही है कुछ दूर चलो आओ ज़रा तुम भी तो देखो किस तरह किनारों को है सीने से लगाए ठहरे हुए पानी की अदा तुम भी तो देखो यादों के समन-ज़ार से आई हुई ख़ुश्बू दामन में छुपा लाई है क्या तुम भी तो देखो कुछ रात गए रोज़ जो आती है फ़ज़ा से हर दिल में है इक ज़ख़्म छुपा तुम भी तो देखो हर हँसते हुए फूल से रिश्ता है ख़िज़ाँ का हर दिल में है इक ज़ख़्म छुपा तुम भी तो देखो क्यूँ आने लगीं साँस में गहराइयाँ सोचो क्यूँ टूट चले बंद-ए-क़बा तुम भी तो देखो

 

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ऑडियो 5

अबदियत

एक ख़्वाहिश

क़र्ज़

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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