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बशीर फ़ारूक़ी

1939 - 2019 | लखनऊ, भारत

ग़ज़ल 10

शेर 6

आगही कर्ब वफ़ा सब्र तमन्ना एहसास

मेरे ही सीने में उतरे हैं ये ख़ंजर सारे

हम तेरे पास के परेशान हैं बहुत

हम तुझ से दूर रहने को तय्यार भी नहीं

चले भी आओ कि ये डूबता हुआ सूरज

चराग़ जलने से पहले मुझे बुझा देगा

पुस्तकें 2

दायरों के दरमियान

 

2009

परों के दरमियाँ

 

1996

 

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