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बेख़ुद देहलवी

1863 - 1955 | दिल्ली, भारत

दाग़ देहलवी के शिष्य

दाग़ देहलवी के शिष्य

बेख़ुद देहलवी

ग़ज़ल 58

अशआर 77

दिल मोहब्बत से भर गया 'बेख़ुद'

अब किसी पर फ़िदा नहीं होता

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दिल मोहब्बत से भर गया 'बेख़ुद'

अब किसी पर फ़िदा नहीं होता

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अदाएँ देखने बैठे हो क्या आईने में अपनी

दिया है जिस ने तुम जैसे को दिल उस का जिगर देखो

अदाएँ देखने बैठे हो क्या आईने में अपनी

दिया है जिस ने तुम जैसे को दिल उस का जिगर देखो

जादू है या तिलिस्म तुम्हारी ज़बान में

तुम झूट कह रहे थे मुझे ए'तिबार था

नअत 1

 

पुस्तकें 7

 

चित्र शायरी 3

 

ऑडियो 17

आप हैं बे-गुनाह क्या कहना

आशिक़ समझ रहे हैं मुझे दिल लगी से आप

आशिक़ हैं मगर इश्क़ नुमायाँ नहीं रखते

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