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बिस्मिल साबरी

1937

पाकिस्तानी मारूफ़ शायरा

पाकिस्तानी मारूफ़ शायरा

बिस्मिल साबरी

ग़ज़ल 7

अशआर 4

वो अक्स बन के मिरी चश्म-ए-तर में रहता है

अजीब शख़्स है पानी के घर में रहता है

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जब आया ईद का दिन घर में बेबसी की तरह

तो मेरे फूल से बच्चों ने मुझ को घेर लिया

निकल के तो गया गहरे पानियों से मगर

कई तरह के सराबों ने मुझ को घेर लिया

अब वादा-ए-फ़र्दा में कशिश कुछ नहीं बाक़ी

दोहराई हुई बात गुज़रती है गिराँ और

चित्र शायरी 1

 

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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