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फ़हमीदा रियाज़

1946 - 2018 | कराची, पाकिस्तान

पाकिस्तानी शायरा। अपने स्त्री-वादी और संस्था-विरोधी विचारों के लिए प्रसिद्ध

पाकिस्तानी शायरा। अपने स्त्री-वादी और संस्था-विरोधी विचारों के लिए प्रसिद्ध

ग़ज़ल

कभी धनक सी उतरती थी उन निगाहों में

अज़रा नक़वी

नज़्म

इश्क़ आवारा-मिज़ाज

अज़रा नक़वी

एक औरत की हँसी

अज़रा नक़वी

एक लड़की से

अज़रा नक़वी

चादर और चार-दीवारी

अज़रा नक़वी

बैठा है मेरे सामने वो

अज़रा नक़वी

बर्फ़-बारी की रुत

अज़रा नक़वी

मेरे हाथ

अज़रा नक़वी

लाओ हाथ अपना लाओ ज़रा

अज़रा नक़वी

अक़्लीमा

फ़हमीदा रियाज़

आलम-ए-बर्ज़ख़

फ़हमीदा रियाज़

इस गली के मोड़ पर

फ़हमीदा रियाज़

एक ज़न-ए-ख़ाना-ब-दोश

फ़हमीदा रियाज़

ख़ाकम-ब-दहन

फ़हमीदा रियाज़

ज़बानों का बोसा

फ़हमीदा रियाज़

तिफ़्लाँ की तो कुछ तक़्सीर न थी

फ़हमीदा रियाज़

दिल्ली तिरी छाँव…

फ़हमीदा रियाज़

नज़्र-ए-फ़िराक़

फ़हमीदा रियाज़

पत्थर की ज़बान

फ़हमीदा रियाज़

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI