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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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Fareed Parbati's Photo'

फ़रीद परबती

1961 - 2011 | श्रीनगर, भारत

फ़रीद परबती के शेर

कभी मेरी तलब कच्चे घड़े पर पार उतरती है

कभी महफ़ूज़ कश्ती में सफ़र करने से डरता हूँ

किसी पे करना नहीं ए'तिबार मेरी तरह

लुटा के बैठोगे सब्र क़रार मेरी तरह

'फ़रीद' इक दिन सहारे ज़िंदगी के टूट जाएँगे

सबब ये है कि ख़ुद को बे-सहारा कर रहा हूँ मैं

तुम्हें भी भूलने की कोशिशें कीं

कि ख़ुद पर भी क़यामत कर गया वो

बगूला बन के उड़ा ख़्वाहिशों के सहरा में

ठहर गया तो फ़क़त था ग़ुबार मेरी तरह

तमन्ना अपनी उन पर आश्कारा कर रहा हूँ मैं

जो पहले कर चुका हूँ अब दोबारा कर रहा हूँ मैं

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