ग़ज़ल 16

शेर 10

उम्र भर मिलने नहीं देती हैं अब तो रंजिशें

वक़्त हम से रूठ जाने की अदा तक ले गया

बहुत सी बातें ज़बाँ से कही नहीं जातीं

सवाल कर के उसे देखना ज़रूरी है

हमारी फ़त्ह के अंदाज़ दुनिया से निराले हैं

कि परचम की जगह नेज़े पे अपना सर निकलता है

मुद्दआ इज़हार से खुलता नहीं है

ये ज़बान-ए-बे-ज़बानी और है

किताबों से दानिश की फ़रावानी से आया है

सलीक़ा ज़िंदगी का दिल की नादानी से आया है

पुस्तकें 5

अमीर ख़ुसरो

म्यूज़िकल ओपेरा

2010

Calendar Ek Nazm

 

1985

दिल्ली का एक यादगार आख़िरी मुशाइरा

 

1846

कलाम-ए-हिज्र

 

1914

सुख़न सराए

 

2013

 

ऑडियो 12

अल्लाह रे हौसला मिरे क़ल्ब-ए-दो-नीम का

असर उस को ज़रा नहीं होता

आज दिल बे-क़रार है मेरा

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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