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फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी

1923 - 2009 | मऊनाथ भंजन, भारत

शायरी में एक आज़ाद सृजनात्मक अभिव्यक्ति के लिए प्रसिद्ध

शायरी में एक आज़ाद सृजनात्मक अभिव्यक्ति के लिए प्रसिद्ध

फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी

ग़ज़ल 37

शेर 29

ग़ज़ल के पर्दे में बे-पर्दा ख़्वाहिशें लिखना

आया हम को बरहना गुज़ारिशें लिखना

उस की क़ुर्बत का नशा क्या चीज़ है

हाथ फिर जलते तवे पर रख दिया

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आँखों के ख़्वाब दिल की जवानी भी ले गया

वो अपने साथ मेरी कहानी भी ले गया

किस तरह उम्र को जाते देखूँ

वक़्त को आँखों से ओझल कर दे

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मुझे तराश के रख लो कि आने वाला वक़्त

ख़ज़फ़ दिखा के गुहर की मिसाल पूछेगा

पुस्तकें 10

 

ऑडियो 10

आँखों के ख़्वाब दिल की जवानी भी ले गया

आह को बाद-ए-सबा दर्द को ख़ुशबू लिखना

जबीं पे गर्द है चेहरा ख़राश में डूबा

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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