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गोया फ़क़ीर मोहम्मद

1784 - 1850 | लखनऊ, भारत

नासिख़ के शिष्य, मराठा शासक यशवंत राव होलकर और अवध के नवाब ग़ाज़ी हैदर की सेना के सदस्य

नासिख़ के शिष्य, मराठा शासक यशवंत राव होलकर और अवध के नवाब ग़ाज़ी हैदर की सेना के सदस्य

ग़ज़ल 22

शेर 24

बिजली चमकी तो अब्र रोया

याद गई क्या हँसी किसी की

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अपने सिवा नहीं है कोई अपना आश्ना

दरिया की तरह आप हैं अपने कनार में

जुनूँ हाथ जो वो ज़ुल्फ़ आई होती

आह ने अर्श की ज़ंजीर हिलाई होती

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पुस्तकें 6

बुस्तान-ए-हिकमत

 

1887

बुस्तान-ए-हिकमत

 

1870

Deewan-e-Goya

 

1863

दीवान-ए-गोया

 

1863

Goya Sahab-e-Saif-o-Qalam

 

1978

इंतिख़ाब-ए-कलाम-ए-फ़क़ीर मोहम्मद खाँ गोया

 

1990

 

ऑडियो 6

किस क़दर मुझ को ना-तवानी है

खोल दी है ज़ुल्फ़ किस ने फूल से रुख़्सार पर

नज़्ज़ारा-ए-रुख़-ए-साक़ी से मुझ को मस्ती है

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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