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हमीद जालंधरी

ग़ज़ल 7

शेर 7

आने लगे हैं वो भी अयादत के वास्ते

चारागर मरीज़ को अच्छा किया जाए

सीने में राज़-ए-इश्क़ छुपाया जाएगा

ये आग वो है जिस को दबाया जाएगा

फिर गई इक और ही दुनिया नज़र के सामने

बैठे बैठे क्या बताऊँ क्या मुझे याद गया