ग़ज़ल 21

शेर 20

बच्चों के साथ आज उसे देखा तो दुख हुआ

उन में से कोई एक भी माँ पर नहीं गया

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जुदाई की रुतों में सूरतें धुँदलाने लगती हैं

सो ऐसे मौसमों में आइना देखा नहीं करते

हमारी जेब में ख़्वाबों की रेज़गारी है

सो लेन-देन हमारा दुकाँ से बाहर है

मोहब्बतें तो फ़क़त इंतिहाएँ माँगती हैं

मोहब्बतों में भला ए'तिदाल क्या करना

धड़कती क़ुर्बतों के ख़्वाब से जागे तो जाना

ज़रा से वस्ल ने कितना अकेला कर दिया है

पुस्तकें 5

फ़सादात के अफ़्साने

भाग-001

1999

Khayaabaan

Volume-002

 

ख़याबाँ

 

1991

Khayaban

 

 

Khwab Azab Hue

 

1985

 

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