हिमांशी बाबरा
ग़ज़ल 20
अशआर 20
उस से कहना कि मिरा साथ निभाए आ कर
मेरा यादों से गुज़ारा नहीं होने वाला
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ऐसे बिछड़ा है कि मिलने की दु'आ करता है
हर मुलाक़ात पे मुँह फेर के जाने वाला
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देखो हमारे दिल में उजाले हैं हर तरफ़
हम इस के बावजूद उजालों से दूर हैं
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मुझे तो तेरी बर्बादी भी बर्बादी नहीं लगती
कि मैं ने वो भी देखा है जो है बर्बाद से आगे
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वो मोहब्बतों के मौसम तुझे याद भी हैं हमदम
मिरा एक बार सुनना तेरा बार बार कहना
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