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हीरानंद सोज़

1922 - 2002

ग़ज़ल 5

 

शेर 3

अजीब हाल था अहद-ए-शबाब में दिल का

मुझे गुनाह भी कार-ए-सवाब लगता था

strange was the condition of my heart in youth

when even sinful deeds seemed piety forsooth

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जनाज़े वालो चुपके क़दम बढ़ाए चलो

उसी का कूचे है टुक करते हाए हाए चलो

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अपने घरों के कर दिए आँगन लहू लहू

हर शख़्स मेरे शहर का क़ाबील हो गया

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पुस्तकें 8

Jangal Jangal Shahar

 

1995

Jangal Jangal Shahr

 

1995

Kaghaz Ki Deewar

 

 

लहू बोलता है

 

1997

Naqsh Gar

 

1988

Sahil Samundar Aur Seep

 

1996

Sahil Samundar Aur Seep

 

1987

Suraj Mere Ta'aqub Mein

 

1990

 

चित्र शायरी 1

अजीब हाल था अहद-ए-शबाब में दिल का मुझे गुनाह भी कार-ए-सवाब लगता था