ग़ज़ल 10

शेर 9

वो लम्हा जब मिरे बच्चे ने माँ पुकारा मुझे

मैं एक शाख़ से कितना घना दरख़्त हुई

रौशन-दान से धूप का टुकड़ा कर मेरे पास गिरा

और फिर सूरज ने कोशिश की मुझ से आँख मिलाने की

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हम और तुम जो बदल गए तो इतनी हैरत क्या

अक्स बदलते रहते हैं आईनों की ख़ातिर

पुस्तकें 3

Indimal

 

1984

Intisab

 

2011

Zakhm Zakhm Ujala

 

1983

 

वीडियो 8

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए

हुमैरा रहमान

At a Mushaira organized by NED Alumni Association of Tri-State (NEDATS)

हुमैरा रहमान

Karachi gymkhana Aalami mushaira

हुमैरा रहमान

फ़सील शहर की इतनी बुलंद ओ सख़्त हुई

हुमैरा रहमान

हवा की तेज़-गामियों का इंकिशाफ़ क्या करें

हुमैरा रहमान

ऑडियो 4

इन लफ़्ज़ों में ख़ुद को ढूँडूँगी मैं भी

ज़रा सी बात पर नाराज़ होना रंजिशें करना

तबीअत इन दिनों औहाम की उन मंज़िलों पर है

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI