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इब्न-ए-मुफ़्ती

ग़ज़ल 9

शेर 15

कैसा जादू है समझ आता नहीं

नींद मेरी ख़्वाब सारे आप के

कर बुरा तो भला नहीं होता

कर भला तो बुरा नहीं होता

हम ने देखा है रू-ब-रू उन के

आईना आईना नहीं होता

इक ज़रा सी बात पे ये मुँह बनाना रूठना

इस तरह तो कोई अपनों से ख़फ़ा होता नहीं

तेरे ख़्वाबों की लत लगी जब से

रात का इंतिज़ार रहता है