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इफ़्तिख़ार मुग़ल

1961 | पाकिस्तान

ग़ज़ल 10

शेर 14

किसी सबब से अगर बोलता नहीं हूँ मैं

तो यूँ नहीं कि तुझे सोचता नहीं हूँ मैं

हम ने उस चेहरे को बाँधा नहीं महताब-मिसाल

हम ने महताब को उस रुख़ के मुमासिल बाँधा

आँख झपकी थी बस इक लम्हे को और इस के ब'अद

मैं ने ढूँडा है तुझे ज़िंदगी सहरा सहरा