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इंद्र सराज़ी

1990 | डोडा, भारत

ग़ज़ल 4

 

शेर 17

सावन की इस रिम-झिम में

भीग रहा है तन्हा चाँद

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कितना प्यारा लगता है

होता है जब पूरा चाँद

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जिस का डर था वही हुआ यारो

वो फ़क़त हम से ही ख़फ़ा निकला

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