Ishrat Qadri's Photo'

इशरत क़ादरी

1926 -

ग़ज़ल 17

शेर 6

इक साया शरमाता लजाता राह में तन्हा छोड़ गया

मैं परछाईं ढूँड रहा हूँ टूटी हुई दीवारों पर

यूँ ज़िंदगी गुज़र रही है मेरी

जो उन की है वही ख़ुशी है मेरी

कौन देखेगा मुझ में अब चेहरा

आईना था बिखर गया हूँ मैं

ई-पुस्तक 3

Aasman Saiyban

 

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