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जाफ़र अली हसरत

1734 - 1792 | लखनऊ, भारत

मीर तक़ी मीर के समकालीन, अपनी इश्क़िया शायरी के लिए मशहूर

मीर तक़ी मीर के समकालीन, अपनी इश्क़िया शायरी के लिए मशहूर

ग़ज़ल 1

 

शेर 2

तुम्हें ग़ैरों से कब फ़ुर्सत हम अपने ग़म से कम ख़ाली

चलो बस हो चुका मिलना तुम ख़ाली हम ख़ाली

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उड़ गई पर से ताक़त-ए-परवाज़

कहीं सय्याद अब रिहा करे

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पुस्तकें 1

kulliyat-e-Hasrat

 

1966

 

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