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Jigar Moradabadi's Photo'

जिगर मुरादाबादी

1890 - 1960 | मुरादाबाद, भारत

सबसे प्रमुख पूर्वाधुनिक शायरों में शामिल अत्याधिक लोकप्रियता के लिए विख्यात

सबसे प्रमुख पूर्वाधुनिक शायरों में शामिल अत्याधिक लोकप्रियता के लिए विख्यात

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जिगर मुरादाबादी

जिगर मुरादाबादी

जिगर मुरादाबादी

जिगर मुरादाबादी

जिगर मुरादाबादी

जिगर मुरादाबादी

जिगर मुरादाबादी

जिगर मुरादाबादी

जिगर मुरादाबादी

जिगर मुरादाबादी

जिगर मुरादाबादी

जिगर मुरादाबादी

जिगर मुरादाबादी

जिगर मुरादाबादी

जिगर मुरादाबादी

जिगर मुरादाबादी

जिगर मुरादाबादी

जिगर मुरादाबादी

जिगर मुरादाबादी

Jigar reciting his poetry in a mushaira

Jigar reciting his poetry in a mushaira जिगर मुरादाबादी

Wo Sabza Nang'e Chaman Hai

जिगर मुरादाबादी

जान कर मिन-जुमला-ए-ख़सान-ए-मय-ख़ाना मुझे

जिगर मुरादाबादी

दुनिया के सितम याद न अपनी ही वफ़ा याद

जिगर मुरादाबादी

ये दिन बहार के अब के भी रास आ न सके

जिगर मुरादाबादी

जिगर मुरादाबादी

अगर न ज़ोहरा-जबीनों के दरमियाँ गुज़रे

जिगर मुरादाबादी

अल्लाह अगर तौफ़ीक़ न दे इंसान के बस का काम नहीं

जिगर मुरादाबादी

क्या त'अज्जुब कि मिरी रूह-ए-रवाँ तक पहुँचे

जिगर मुरादाबादी

जेहल-ए-ख़िरद ने दिन ये दिखाए

जिगर मुरादाबादी

जान कर मिन-जुमला-ए-ख़सान-ए-मय-ख़ाना मुझे

जिगर मुरादाबादी

दुनिया के सितम याद न अपनी ही वफ़ा याद

जिगर मुरादाबादी

ये दिन बहार के अब के भी रास आ न सके

जिगर मुरादाबादी

शाएर-ए-फ़ितरत हूँ जब भी फ़िक्र फ़रमाता हूँ मैं

जिगर मुरादाबादी

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Kahkashan (Documentary on Jigar Muradabadi) Part 1

Kahkashan (Documentary on Jigar Muradabadi) Part 2

Kahkashan (Documentary on Jigar Muradabadi) Part 3

Kahkashan (Documentary on Jigar Muradabadi) Part 4

Kahkashan (Documentary on Jigar Muradabadi) Part 5

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Nazar Woh Hai Ke Jo जगजीत सिंह

Yahan kaamp jaate hain

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इस 'इश्क़ के हाथों से हरगिज़ न मफ़र देखा बेगम अख़्तर

कोई ये कह दे गुलशन गुलशन

कोई ये कह दे गुलशन गुलशन बेगम अख़्तर

दुनिया के सितम याद न अपनी ही वफ़ा याद

दुनिया के सितम याद न अपनी ही वफ़ा याद बेगम अख़्तर

अगर न ज़ोहरा-जबीनों के दरमियाँ गुज़रे

अगर न ज़ोहरा-जबीनों के दरमियाँ गुज़रे विनोद सहगल

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अब तो ये भी नहीं रहा एहसास अज्ञात

आँखों का था क़ुसूर न दिल का क़ुसूर था

आँखों का था क़ुसूर न दिल का क़ुसूर था नाज़िश

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आँखों में बस के दिल में समा कर चले गए अज्ञात

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आदमी आदमी से मिलता है आबिदा परवीन

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आया न रास नाला-ए-दिल का असर मुझे इक़बाल बानो

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इक लफ़्ज़-ए-मोहब्बत का अदना ये फ़साना है आबिदा परवीन

कभी शाख़ ओ सब्ज़ा ओ बर्ग पर कभी ग़ुंचा ओ गुल ओ ख़ार पर

कभी शाख़ ओ सब्ज़ा ओ बर्ग पर कभी ग़ुंचा ओ गुल ओ ख़ार पर आशा भोसले

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कोई ये कह दे गुलशन गुलशन बेगम अख़्तर

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जो अब भी न तकलीफ़ फ़रमाइएगा अज्ञात

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तबीअत इन दिनों बेगाना-ए-ग़म होती जाती है बेगम अख़्तर

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दिल में किसी के राह किए जा रहा हूँ मैं सुधीर नारायण

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दिल में किसी के राह किए जा रहा हूँ मैं अज्ञात

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