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जुरअत क़लंदर बख़्श

1748 - 1809 | लखनऊ, भारत

अपनी शायरी में महबूब के साथ मामला-बंदी के मज़मून के लिए मशहूर, नौजवानी में नेत्रहीन हो गए

अपनी शायरी में महबूब के साथ मामला-बंदी के मज़मून के लिए मशहूर, नौजवानी में नेत्रहीन हो गए

जुरअत क़लंदर बख़्श की ई-पुस्तक

जुरअत क़लंदर बख़्श की पुस्तकें

5

Deewan Jurat

1912

Kulliyat-e-Jurat

1971

Kulliyat-e-Jurat

Volume-001

1970

कुल्लियात-ए-जुर्अत

खण्ड-001

1968

मुंतख़ब दीवान-ए-जुरअत

गुलदस्ता-ए- मसर्रत

1868

जुरअत क़लंदर बख़्श पर पुस्तकें

1

Qalandar Bakhsh Jurat

1990

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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