कामी शाह
ग़ज़ल 7
अशआर 7
दिए के और हवाओं के मरासिम खुल नहीं पाते
नहीं खुलता कि इन में से ये किस की आज़माइश है
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दिए के और हवाओं के मरासिम खुल नहीं पाते
नहीं खुलता कि इन में से ये किस की आज़माइश है
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वैसे तुम अच्छी लड़की हो
लेकिन मेरी क्या लगती हो
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वैसे तुम अच्छी लड़की हो
लेकिन मेरी क्या लगती हो
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मैं अपने दिल की कहता हूँ
तुम अपने दिल की सुनती हो
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