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कैफ़ अहमद सिद्दीकी

1943 - 1986 | सीतापुर, भारत

कैफ़ अहमद सिद्दीकी

ग़ज़ल 21

नज़्म 20

अशआर 14

ख़ुशी की आरज़ू क्या दिल में ठहरे

तिरे ग़म ने बिठा रक्खे हैं पहरे

इक बरस भी अभी नहीं गुज़रा

कितनी जल्दी बदल गए चेहरे

महसूस हो रहा है कि मैं ख़ुद सफ़र में हूँ

जिस दिन से रेल पर मैं तुझे छोड़ने गया

आज कुछ ऐसे शोले भड़के बारिश के हर क़तरे से

धूप पनाहें माँग रही है भीगे हुए दरख़्तों में

सर्द जज़्बे बुझे बुझे चेहरे

जिस्म ज़िंदा हैं मर गए चेहरे

पुस्तकें 5

 

चित्र शायरी 1

 

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Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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