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कैफ़ भोपाली

1917 - 1991 | भोपाल, भारत

प्रसिद्ध शायर एवं गीतकार जो फिल्म "पाकीज़ा" में अपने गीत के लिए मशहूर हुए।

प्रसिद्ध शायर एवं गीतकार जो फिल्म "पाकीज़ा" में अपने गीत के लिए मशहूर हुए।

कैफ़ भोपाली

ग़ज़ल 29

अशआर 37

ज़िंदगी शायद इसी का नाम है

दूरियाँ मजबूरियाँ तन्हाइयाँ

दाग़ दुनिया ने दिए ज़ख़्म ज़माने से मिले

हम को तोहफ़े ये तुम्हें दोस्त बनाने से मिले

तुझे कौन जानता था मिरी दोस्ती से पहले

तिरा हुस्न कुछ नहीं था मिरी शाइरी से पहले

कौन आएगा यहाँ कोई आया होगा

मेरा दरवाज़ा हवाओं ने हिलाया होगा

आग का क्या है पल दो पल में लगती है

बुझते बुझते एक ज़माना लगता है

पुस्तकें 11

चित्र शायरी 13

वीडियो 5

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ऑडियो 7

कौन आएगा यहाँ कोई न आया होगा

जब हमें मस्जिद जाना पड़ा है

तेरा चेहरा कितना सुहाना लगता है

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aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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