कैलाश माहिर
ग़ज़ल 24
नज़्म 12
अशआर 3
जाने क्या सोच के हम तुझ से वफ़ा करते हैं
क़र्ज़ है पिछले जन्म का सो अदा करते हैं
-
शेयर कीजिए
- ग़ज़ल देखिए
जाने क्या सोच के हम तुझ से वफ़ा करते हैं
क़र्ज़ है पिछले जन्म का सो अदा करते हैं
-
शेयर कीजिए
- ग़ज़ल देखिए
रिश्ता-ए-दर्द की मीरास मिली है हम को
हम तिरे नाम पे जीने की ख़ता करते हैं
-
शेयर कीजिए
- ग़ज़ल देखिए