ग़ज़ल 3

 

शेर 3

तुम भी इस शहर में बन जाओगे पत्थर जैसे

हँसने वाला यहाँ कोई है रोने वाला

  • शेयर कीजिए

जाने क्या सोच के हम तुझ से वफ़ा करते हैं

क़र्ज़ है पिछले जन्म का सो अदा करते हैं

रिश्ता-ए-दर्द की मीरास मिली है हम को

हम तिरे नाम पे जीने की ख़ता करते हैं

 

पुस्तकें 2

लम्हा लम्हा प्यास

 

1991

Lams-e-Hawa

 

1928

 

"मुरादाबाद" के और शायर

  • जिगर मुरादाबादी जिगर मुरादाबादी
  • ज़िया ज़मीर ज़िया ज़मीर
  • दुष्यंत कुमार दुष्यंत कुमार
  • मंसूर उस्मानी मंसूर उस्मानी
  • गौहर उस्मानी गौहर उस्मानी
  • सुबहान असद सुबहान असद
  • शाकिर हुसैन इस्लाही शाकिर हुसैन इस्लाही
  • आरिफ हसन  ख़ान आरिफ हसन ख़ान
  • एजाज़ वारसी एजाज़ वारसी
  • सग़ीर अालम सग़ीर अालम