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करामत बुख़ारी

करामत बुख़ारी

ग़ज़ल 10

शेर 10

आह तो अब भी दिल से उठती है

लेकिन उस में असर नहीं होता

मैं कि तेरे ध्यान में गुम था

दुनिया मुझ को ढूँढ रही थी

पर्वाज़ में था अम्न का मासूम परिंदा

सुनते हैं कि बे-चारा शजर तक नहीं पहुँचा

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याद आने का व'अदा कर के

वो तो पहले से सिवा याद आया

एक नज़र में उस ने हर इक दिल को जीत लिया

एक नज़र में उस के हो गए जाने कितने लोग