Kashif Husain Ghair's Photo'

काशिफ़ हुसैन ग़ाएर

1979 | कराची, पाकिस्तान

नई पीढ़ी के प्रतिष्ठित शायर

नई पीढ़ी के प्रतिष्ठित शायर

ग़ज़ल 31

शेर 26

हाल पूछा करे हाथ मिलाया करे

मैं इसी धूप में ख़ुश हूँ कोई साया करे

हमारी ज़िंदगी पर मौत भी हैरान है 'ग़ाएर'

जाने किस ने ये तारीख़-ए-पैदाइश निकाली है

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क्या चाहती है हम से हमारी ये ज़िंदगी

क्या क़र्ज़ है जो हम से अदा हो नहीं रहा

कल रात जगाती रही इक ख़्वाब की दूरी

और नींद बिछाती रही बिस्तर मिरे आगे

धूप साए की तरह फैल गई

इन दरख़्तों की दुआ लेने से

चित्र शायरी 2

मौत का क्या काम जब इस शहर में ज़िंदगी जैसी बला मौजूद है

 

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