Khushbir Singh Shaad's Photo'

ख़ुशबीर सिंह शाद

1954 | जालंधर, भारत

सबसे महत्वपूर्ण समकालीन शायरों में से एक, लोकप्रियता भी हासिल।

सबसे महत्वपूर्ण समकालीन शायरों में से एक, लोकप्रियता भी हासिल।

ग़ज़ल 27

शेर 36

रेज़ा रेज़ा कर दिया जिस ने मिरे एहसास को

किस क़दर हैरान है वो मुझ को यकजा देख कर

ये सच है चंद लम्हों के लिए बिस्मिल तड़पता है

फिर इस के बअ'द सारी ज़िंदगी क़ातिल तड़पता है

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मिरे अंदर कई एहसास पत्थर हो रहे हैं

ये शीराज़ा बिखरना अब ज़रूरी हो गया है

पुस्तकें 5

Bat Andar Ke Mausam Ki

 

2014

Bikharne Se Zara Pahle

 

2011

Shahr Ke Shor Se Juda

 

2016

ज़रा ये धूप ढल जाये

 

2005

 

वीडियो 10

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
bahot dino se mere baam o dar ka hissa hai

bahot dino se mere baam o dar ka hissa hai ख़ुशबीर सिंह शाद

Khushbir Singh Shaad reciting his Ghazal/Nazm at Mushaira (Shaam-e-Sher) by Rekhta.org-2014

Khushbir Singh better known as Khushbir Singh "Shaad" is one of the popular Urdu Poets of the present era. The simplicity and sensitivity of his personality has a great impact on his writing that could obviously be felt by readers. Rekhta.org makes available ghazals, sher, shayari, nazms available in Hindi, English and Roman scripts. http://rekhta.org ख़ुशबीर सिंह शाद

kisi takhliq kay paikar me aana chahta hu

kisi takhliq kay paikar me aana chahta hu ख़ुशबीर सिंह शाद

ख़ुशबीर सिंह शाद

ख़ुशबीर सिंह शाद

Ragon mein zehr e Khaamoshi utarne se zara pehle_Ghazal by Khushbir Singh Shaad

Khushbir Singh better known as Khushbir Singh "Shaad" is one of the popular Urdu Poets of the present era. The simplicity and sensitivity of his personality has a great impact on his writing that could obviously be felt by readers. Rekhta.org makes available ghazals, sher, shayari, nazms available in Hindi, English and Roman scripts. ख़ुशबीर सिंह शाद

Tum har baar lafzon ki zubani kyun samajhte ho_Ghazal by Khushbir Singh Shaad

Khushbir Singh better known as Khushbir Singh "Shaad" is one of the popular Urdu Poets of the present era. The simplicity and sensitivity of his personality has a great impact on his writing that could obviously be felt by readers. Rekhta.org makes available ghazals, sher, shayari, nazms available in Hindi, English and Roman scripts. ख़ुशबीर सिंह शाद

ये तुम हर बात लफ़्ज़ों की ज़बानी क्यूँ समझते हो

ख़ुशबीर सिंह शाद

शाम तक फिर रंग ख़्वाबों का बिखर जाएगा क्या

ख़ुशबीर सिंह शाद

हम इस दयार के इस ख़ाक-दाँ के थे ही नहीं

ख़ुशबीर सिंह शाद

ऑडियो 6

इस इंतिशार का कोई असर भी है कि नहीं

परिंदे बे-ख़बर थे सब पनाहें कट चुकी हैं

बुझा के मुझ में मुझे बे-कराँ बनाता है

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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