कुलदीप कुमार
ग़ज़ल 120
अशआर 2
मौसम-ए-याद यूँ उजलत में न वारे जाएँ
हम वो लम्हे हैं जो फ़ुर्सत से गुज़ारे जाएँ
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere