एम.आर .क़ासमी
ग़ज़ल 1
अशआर 1
मुझी से आई थी मिलने उदास चाँदनी रात
अगर ये जानता होता तो जागता भी मैं
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere