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महमूद अयाज़

1929 - 1997 | बैंगलोर, भारत

अपनी साहित्यिक पत्रिका 'सौग़ात' के लिए विख्यात।

अपनी साहित्यिक पत्रिका 'सौग़ात' के लिए विख्यात।

महमूद अयाज़

ग़ज़ल 12

नज़्म 18

अशआर 10

लफ़्ज़ मंज़र में मआनी को टटोला करो

होश वाले हो तो हर बात को समझा करो

वो नहीं है सही तर्क-ए-तमन्ना करो

दिल अकेला है इसे और अकेला करो

चाँद ख़ामोश जा रहा था कहीं

हम ने भी उस से कोई बात की

जीने वालों से कहो कोई तमन्ना ढूँडें

हम तो आसूदा-ए-मंज़िल हैं हमारा क्या है

वो मिरे साथ है साए की तरह

दिल की ज़िद है कि नज़र भी आए

पुस्तकें 42

ऑडियो 12

अस्पताल का कमरा

ऐ जू-ए-आब

नया सफ़र

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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