महमूद सरोश
ग़ज़ल 10
अशआर 1
अब मुझ से कारोबार की हालत न पूछिए
आईना बेचता हूँ मैं अंधों के शहर में
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere