महशर बदायुनी का परिचय
अब हवाएँ ही करेंगी रौशनी का फ़ैसला
जिस दिए में जान होगी वो दिया रह जाएगा
महशर बदायूनी, फ़ारूक़ अहमद ( 1922-1994) किसी भी विचार धारा और गुट से अलग, ग़ज़ल-परंपरा की रौशनी और अपनी मौज में शेर कहने वाले प्रमुख शाइर। बदायूँ (उत्तर प्रदेश) में, शाइरों के घराने में जन्म। बटवारे के बाद कराची जाब से जहाँ रेडियो से संबंधित रहे।