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महशर बदायुनी

1922 - 1994 | पाकिस्तान

ग़ज़ल 56

नज़्म 4

 

शेर 7

अब हवाएँ ही करेंगी रौशनी का फ़ैसला

जिस दिए में जान होगी वो दिया रह जाएगा

the winds will now decide what happens to the light

those lamps that have the strength, will survive the night

the winds will now decide what happens to the light

those lamps that have the strength, will survive the night

जिस के लिए बच्चा रोया था और पोंछे थे आँसू बाबा ने

वो बच्चा अब भी ज़िंदा है वो महँगा खिलौना टूट गया

हम को भी ख़ुश-नुमा नज़र आई है ज़िंदगी

जैसे सराब दूर से दरिया दिखाई दे

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ई-पुस्तक 2

Mahfil-e-Khawateen

1938 Se 1947 Tak

1948

Shahr-e-Nawa

 

1964

 

चित्र शायरी 1

उसे हम भी भूल बैठे न कर उस का ज़िक्र तू भी कोई चाक अगर हो ज़ाहिर तो करें उसे रफ़ू भी चलो चल के पूछ आएँ कि ख़िज़ाँ की इस गली में कभी आ चुका हो शायद कोई सैल-ए-रंग-ओ-बू भी उड़ी तिश्नगी के कूचे में वो गर्द इक तरफ़ से हम उठा सके न ताक़ों से गिरे हुए सुबू भी अभी कैसे भूल जाऊँ मैं ये वाक़िआ सफ़र में अभी गर्द-ए-रफ़्तगाँ भी है जगह जगह लहू भी इस इरम इरम ज़मीं पर कि बहार उमँड रही है कोई फूल अगर खिला दे मिरी बे-नुमू भी तिरी अंजुमन की रौनक़ में न फ़र्क़ आएगा कुछ हमें चुप बिठाने वाले कभी हम से गुफ़्तुगू भी मेरे ख़ाल-ओ-ख़द को सूरत का फ़रोग़ देने वालो किसी नक़्श में दिखाओ मिरा ज़ख़्म-ए-शोला-रू भी

 

वीडियो 8

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शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
Mahshar Badayuni at a mushaira

महशर बदायुनी

Reading his poetry at a mushaira

महशर बदायुनी

करे दरिया न पुल मिस्मार मेरे

महशर बदायुनी

करे दरिया न पुल मिस्मार मेरे

महशर बदायुनी

मिट्टी की इमारत साया दे कर मिट्टी में हमवार हुई

महशर बदायुनी

लब-ए-तलब भी न फिर माइल-ए-सवाल हुआ

महशर बदायुनी

वो हाल है कि तलाश-ए-नजात की जाए

महशर बदायुनी

वो हाल है कि तलाश-ए-नजात की जाए

महशर बदायुनी

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