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मजरूह सुल्तानपुरी के वीडियो
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शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
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शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
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मजरूह सुल्तानपुरी
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मजरूह सुल्तानपुरी
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मजरूह सुल्तानपुरी
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Mana shab-e-gham subh ki mehram to nahin hai मजरूह सुल्तानपुरी
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आ ही जाएगी सहर मतला-ए-इम्काँ तो खुला मजरूह सुल्तानपुरी
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गो रात मिरी सुब्ह की महरम तो नहीं है मजरूह सुल्तानपुरी
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चमन है मक़्तल-ए-नग़्मा अब और क्या कहिए मजरूह सुल्तानपुरी
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जला के मिशअल-ए-जाँ हम जुनूँ-सिफ़ात चले मजरूह सुल्तानपुरी
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जला के मिशअल-ए-जाँ हम जुनूँ-सिफ़ात चले मजरूह सुल्तानपुरी
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ब-नाम-ए-कूचा-ए-दिलदार गुल बरसे कि संग आए मजरूह सुल्तानपुरी
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मुझ से कहा जिब्रील-ए-जुनूँ ने ये भी वहइ-ए-इलाही है मजरूह सुल्तानपुरी
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मुझ से कहा जिब्रील-ए-जुनूँ ने ये भी वहइ-ए-इलाही है मजरूह सुल्तानपुरी
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हमें शुऊर-ए-जुनूँ है कि जिस चमन में रहे मजरूह सुल्तानपुरी
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हमें शुऊर-ए-जुनूँ है कि जिस चमन में रहे मजरूह सुल्तानपुरी
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आह-ए-जाँ-सोज़ की महरूमी-ए-तासीर न देख मजरूह सुल्तानपुरी
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गो रात मिरी सुब्ह की महरम तो नहीं है मजरूह सुल्तानपुरी
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चमन है मक़्तल-ए-नग़्मा अब और क्या कहिए मजरूह सुल्तानपुरी
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जब हुआ इरफ़ाँ तो ग़म आराम-ए-जाँ बनता गया मजरूह सुल्तानपुरी
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जला के मिशअल-ए-जाँ हम जुनूँ-सिफ़ात चले मजरूह सुल्तानपुरी
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जला के मिशअल-ए-जाँ हम जुनूँ-सिफ़ात चले मजरूह सुल्तानपुरी
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ब-नाम-ए-कूचा-ए-दिलदार गुल बरसे कि संग आए मजरूह सुल्तानपुरी
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ब-नाम-ए-कूचा-ए-दिलदार गुल बरसे कि संग आए मजरूह सुल्तानपुरी
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हम को जुनूँ क्या सिखलाते हो हम थे परेशाँ तुम से ज़ियादा मजरूह सुल्तानपुरी
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हम को जुनूँ क्या सिखलाते हो हम थे परेशाँ तुम से ज़ियादा मजरूह सुल्तानपुरी
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हमें शुऊर-ए-जुनूँ है कि जिस चमन में रहे मजरूह सुल्तानपुरी
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हम हैं मता-ए-कूचा-ओ-बाज़ार की तरह मजरूह सुल्तानपुरी
शायरी वीडियो
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मजरूह सुल्तानपुरी
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अन्नू कपूर
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Rehte the kabhi jinke dil mein राधिका चोपड़ा
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Shaam-e-gham ki qasam तलअत महमूद
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Uthaye ja unke sitam aur jiye ja लता मंगेशकर
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Wo jo mu pher kar guzar jaae भारती विश्वनाथन
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ऐ दिल मुझे ऐसी जगह ले चल जहाँ कोई न हो अज्ञात
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ऐ दिल मुझे ऐसी जगह ले चल जहाँ कोई न हो तलअत महमूद
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कहीं बे-ख़याल हो कर युंही छू लिया किसी ने अज्ञात
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कोई हम-दम न रहा कोई सहारा न रहा अज्ञात
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कोई हम-दम न रहा कोई सहारा न रहा किशोर कुमार
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मुझे सहल हो गईं मंज़िलें वो हवा के रुख़ भी बदल गए अज्ञात
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रहते थे कभी जिन के दिल में हम जान से भी प्यारों की तरह अज्ञात
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हमारे बा'द अब महफ़िल में अफ़्साने बयाँ होंगे अज्ञात
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हम हैं मता-ए-कूचा-ओ-बाज़ार की तरह लता मंगेशकर