मशकूर ममनून क़न्नौजी
ग़ज़ल 17
अशआर 1
पा लिया अहल-ए-जुनूँ ने फिर शहादत का मक़ाम
अक़्ल वाले मग़्फ़िरत की ही दुआ माँगा किए
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere