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मीर हसन

1717 - 1786 | लखनऊ, भारत

अत्यंत लोकप्रिय और प्रतिष्ठित शायर, मसनवी ‘सहर-उल-बयान’ के रचयिता। प्रमुख कृतियों में ग़ज़लों का दीवान और ‘तज़किरा-ए-शोअरा-ए-उर्दू’ शामिल हैं, जो फ़ारसी भाषा में लिखी गई उर्दू शायरों की जीवनीपरक तज़किरा है

अत्यंत लोकप्रिय और प्रतिष्ठित शायर, मसनवी ‘सहर-उल-बयान’ के रचयिता। प्रमुख कृतियों में ग़ज़लों का दीवान और ‘तज़किरा-ए-शोअरा-ए-उर्दू’ शामिल हैं, जो फ़ारसी भाषा में लिखी गई उर्दू शायरों की जीवनीपरक तज़किरा है

मीर हसन

ग़ज़ल 95

अशआर 110

सदा ऐश दौराँ दिखाता नहीं

गया वक़्त फिर हाथ आता नहीं

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दोस्ती किस से न थी किस से मुझे प्यार न था

जब बुरे वक़्त पे देखा तो कोई यार न था

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जो कोई आवे है नज़दीक ही बैठे है तिरे

हम कहाँ तक तिरे पहलू से सरकते जावें

आसाँ न समझियो तुम नख़वत से पाक होना

इक उम्र खो के हम ने सीखा है ख़ाक होना

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आश्ना बेवफ़ा नहीं होता

बेवफ़ा आश्ना नहीं होता

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रुबाई 4

 

नअत 1

 

मसनवी 1

 

पुस्तकें 39

चित्र शायरी 5

 

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